चेस्ट कार चालक के परिजनों का दावा है कि आदर्श को करेंसी चेस्ट में हुई गड़बड़ी की जानकारी थी। आशंका जताई गई है कि कहीं वह इस मामले में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक न कर दे, इसलिए उसे अगवा कराया गया। हालांकि पुलिस ने फिलहाल मामले को गुमशुदगी के तौर पर दर्ज किया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। आदर्श के पिता शिवप्रसाद ने बताया कि वह ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका बेटा पिछले करीब चार-पांच साल से पीएनबी की करेंसी चेस्ट में ड्राइवर की नौकरी कर रहा था। उसकी जिम्मेदारी करेंसी चेस्ट से विभिन्न बैंक शाखाओं तक नकदी पहुंचाने वाली गाड़ी चलाने की थी।
शिवप्रसाद के मुताबिक पांच सितंबर की दोपहर आदर्श के पास उसके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी का फोन आया था। फोन पर उससे कहा गया कि ‘सर बुला रहे हैं।’ इसके बाद आदर्श घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गया। परिवार ने अपने स्तर से कई जगह तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। आदर्श के लापता होने के कुछ घंटे बाद आरोपी बताए जा रहे बैंककर्मी के परिवार के सदस्य और एक अन्य व्यक्ति उनके घर पहुंचे और आदर्श के बारे में जानकारी लेने लगे। इस घटनाक्रम ने परिवार की आशंका को और गहरा कर दिया।
पिता शिवप्रसाद ने अपनी शिकायत में बैंककर्मी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि जुलाई में आदर्श के नाम पर 4.90 लाख और 2.70 लाख रुपये की दो बाइक खरीदी गई थीं। इसके अलावा दो दुकान और दो प्लॉट भी आदर्श के नाम पर खरीदे जाने की बात कही गई है। परिवार का आरोप है कि इन संपत्तियों और वाहनों का इस्तेमाल संबंधित बैंककर्मी स्वयं कर रहा है। शिवप्रसाद ने आशंका जताई कि इनकी खरीद में इस्तेमाल रकम का संबंध करेंसी चेस्ट में हुए कथित गबन से हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
आदर्श के पिता ने यह भी दावा किया कि उनके बेटे ने करीब दो महीने पहले करेंसी चेस्ट में चल रही कथित गड़बड़ी की जानकारी बैंक अधिकारियों को दी थी। आरोप है कि उसे मामले में चुप रहने के लिए कहा गया था। शिवप्रसाद ने कहा कि यदि उनके बेटे की भी इस मामले में कोई भूमिका है तो जांच एजेंसियां उससे पूछताछ करें, लेकिन पहले यह पता लगाया जाना जरूरी है कि वह कहां है और उसके साथ क्या हुआ। उन्होंने पुलिस पर तहरीर बदलकर केवल गुमशुदगी दर्ज करने का आरोप भी लगाया है। वहीं एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, पुलिस को तहरीर मिली है और संबंधित थाना पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पुलिस आदर्श के मोबाइल नंबर, उसके अंतिम लोकेशन और उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटा सकती है। साथ ही बैंककर्मी पर लगाए गए आरोपों और आदर्श के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों व वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। इधर, पीएनबी करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। एनआईए ने इस मामले में नामजद बैंक अधिकारी अमित कुमार को गिरफ्तार किया है। मामले में पीएनबी के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और करनाल मंडल की खेरा बाजार जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद आरोपियों को निलंबित किया गया था।
एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और कथित तौर पर असली करेंसी के गबन में किन लोगों की भूमिका थी। एजेंसी बैंक कर्मचारियों के संभावित नेटवर्क और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ऐसे में करेंसी चेस्ट के ड्राइवर आदर्श का अचानक लापता होना जांच को एक नई दिशा दे सकता है। फिलहाल अपहरण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब पुलिस की जांच और एनआईए की कार्रवाई से यह साफ होगा कि आदर्श के लापता होने का 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मामले से कोई संबंध है या नहीं।

